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देवास अस्पताल का कारनामा! प्रसूता को दिखाया ‘अपात्र’, पहली डिलीवरी पर भी योजना के लाभ से रखा वंचित; सीएमएचओ समेत 6 अफसर-कर्मचारी दंडित!
उज्जैन लाइव, उज्जैन, श्रुति घुरैया:
देवास जिले से स्वास्थ्य विभाग की एक बड़ी लापरवाही सामने आई है। जननी सुरक्षा योजना और मुख्यमंत्री श्रमिक सेवा प्रसूति सहायता योजना के तहत पात्र महिला को भुगतान न करने और इस पूरे मामले में वरिष्ठ अधिकारियों को गुमराह करने पर जिला अस्पताल के कई अधिकारी और कर्मचारियों पर गाज गिरी है।
शिकायत से खुला पूरा मामला
यह मामला तब सामने आया जब पीड़ित महिला ने सीएम हेल्पलाइन पर शिकायत दर्ज कराई। शिकायत में बताया गया कि जिला अस्पताल देवास में प्रसव के बाद महिला को योजना का लाभ मिलना था, लेकिन भुगतान नहीं किया गया।
जांच में चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। जिला चिकित्सालय में पदस्थ आउटसोर्स कंप्यूटर ऑपरेटर ने अनमोल पोर्टल पर महिला की गलत प्रविष्टि कर दी। इसके चलते महिला योजना के भुगतान हेतु “अपात्र” प्रदर्शित हो रही थी।
महिला को अधिकार से वंचित करने की कोशिश
राज्य कार्यालय के संज्ञान में मामला आने पर निर्देश दिए गए कि महिला को रोगी कल्याण समिति से भुगतान किया जाए। लेकिन स्थानीय स्तर पर फिर से गड़बड़ी की गई—गलत UTR नंबर डालकर भुगतान दर्शा दिया गया।
इतना ही नहीं, महिला को श्रमिक होते हुए भी गलत तरीके से दिखाया गया कि उसके “दो से अधिक बच्चे” हैं और इसी आधार पर श्रमिक प्रसूति सहायता योजना से भी वंचित कर दिया गया। जबकि हकीकत यह थी कि महिला की यह पहली डिलीवरी थी।
जांच में लापरवाही साबित, कार्रवाई तेज
कलेक्टर देवास ने इस मामले की गहन जांच करवाई। जांच रिपोर्ट में स्पष्ट हो गया कि जिला अस्पताल में गंभीर स्तर पर लापरवाही हुई और जिम्मेदार कर्मचारी एवं अधिकारी लगातार मामले को छिपाने और तोड़-मरोड़कर पेश करने की कोशिश कर रहे थे।
अधिकारियों और कर्मचारियों पर गिरी गाज
स्वास्थ्य विभाग ने सख्त रुख अपनाते हुए कई जिम्मेदारों पर बड़ी कार्रवाई की है—
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तत्कालीन सिविल सर्जन एवं वर्तमान देवास सीएमएचओ डॉ. सरोजिनी जेम्स पर कार्रवाई करते हुए उनकी वेतन वृद्धि रोकने हेतु कारण बताओ नोटिस जारी किया गया।
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सहायक अस्पताल प्रबंधक प्रमोद गुणवान की दो वेतन वृद्धि रोकी गई।
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जिला कार्यक्रम प्रबंधक कामाक्षी दुबे और संविदा लेखापाल डिंपल बघेल को कारण बताओ नोटिस देकर वेतन कटौती की गई।
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बहुउद्देशीय स्वास्थ्य कार्यकर्ता अजय पांडे को निलंबित किया गया।
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तत्कालीन संविदा लेखपाल शारदा सूर्यवंशी और कंप्यूटर ऑपरेटर धर्मेंद्र राजोरिया की सेवाएं समाप्त कर दी गईं।
सीएम हेल्पलाइन से मिली पीड़िता को न्याय
मध्यप्रदेश शासन लगातार यह दावा करता रहा है कि हर पात्र हितग्राही को उसका अधिकार मिलेगा। इस मामले ने साबित कर दिया कि सीएम हेल्पलाइन और समाधान ऑनलाइन जैसी व्यवस्थाएं आम जनता के लिए कितनी जरूरी हैं। मुख्यमंत्री खुद इन शिकायतों की समीक्षा करते हैं और दोषियों पर कार्रवाई सुनिश्चित कराते हैं।
देवास जिला अस्पताल का यह मामला केवल एक महिला के अधिकार छिनने की कहानी नहीं है, बल्कि यह बताता है कि जमीनी स्तर पर भ्रष्टाचार और लापरवाही किस हद तक लोगों को नुकसान पहुंचा सकती है।
अब सवाल यह है—क्या सिर्फ वेतन रोकने और सेवाएं समाप्त करने जैसी कार्रवाई से ही ऐसे मामलों पर लगाम लगेगी, या फिर स्वास्थ्य तंत्र में व्यवस्थित सुधार की दिशा में ठोस कदम उठाए जाएंगे?